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Jai Gurudev!

नज़र - ए - रहमत


"तेरा साथ" क्या मिला 
हमारी ज़िन्दगी ही बदल गई 
मेहरबां क्या मिला 
हमें मेहरबानी मिल गई 
अब हमें भी जीने की 
इक वजह मिल गई 

ज़िन्दगी  थी तब भी वही 
ज़िन्दगी है अब भी वही 
पर अब ज़िन्दगी को 
"एक ख़ूबसूरत" नज़र मिल गई 

देखी जो तेरी मुस्कुराहट 
मुझे मेरी मुस्कुराहट मिल गई 
हुए तुझसे क्या रुबरु
मुझे मेरी पहचान मिल गई 

मिला हमें जो तेरा दीदार 
रुह को मेरी उसकी मंजिल मिल गई 
क्यूँ कहलाता है वो पर्वते-ए - दीगार 
इसकी हमें ख़ूब पहचान मिल गई 

सच कहें तो इस मेहर के लायक नही थे हम 
ख़ुदा की यह रहमत हमें बस यूँही मिल गई 
तेरा साथ क्या मिला हमारी ज़िन्दगी ही बदल गई 
हाँ अब हमें भी जीने की वजह मिल गई 
ज़िन्दगी को अब एक  ख़ूबसूरत नज़र मिल गई 
मेरी नज़रों को "तेरी नज़र" जो मिल गई..!!

By: A Devotee